अररिया की घटना: जब एक जान गई और इंसानियत हार गई बिहार के अररिया (फारबिसगंज) में जो हुआ, वो सिर्फ एक हत्या नहीं थी… वो हमारे समाज की सोच का आईना है। दिन-दहाड़े, मामूली से विवाद में नबी हसन का गला काट दिया गया। सब कुछ लोगों के सामने हुआ… लेकिन कोई आगे नहीं आया। लोग वहां थे, पर मदद के लिए नहीं— वीडियो बनाने के लिए। सोचिए, अगर उसी वक्त कुछ लोग हिम्मत दिखाते, तो शायद एक जान बच सकती थी। कातिल ने एक इंसान को मारा, लेकिन भीड़ की खामोशी ने इंसानियत को मार दिया। आज सवाल सिर्फ उस हमलावर पर नहीं है, सवाल हम सब पर है— क्या हम इतने कमजोर हो गए हैं कि गलत के सामने खड़े भी नहीं हो सकते? या फिर हम खुद ही तमाशबीन बन चुके हैं? यह घटना हमें एक ही बात सिखाती है— अगर समाज चुप रहेगा, तो ऐसे हादसे बार-बार होते रहेंगे। कातिल का भी इसी तरह से बीच चौराहे पर वही सजा दो फिर किसी की दुबारा ऐसी घटना करने से लाले 100 बार सोचे गा क्यूँ की उसको भी उसी तकलीफ से गुजरना होगा सच बात रहा हूँ अगर आरोपी मुस्लिम होता हो आज पूरे देश के मुसलमानो को लोग गली दे रहे होते लेकिन अभी किसी की जबान नह...